राज्य सरकार द्वारा प्राप्त एवं दिए गए ऋणों एवं अग्रिमों के लेखांकन की प्रक्रिया

राज्य सरकार द्वारा प्राप्त तथा दिए गए ऋणों एवं अग्रिमों के लेखांकन हेतु निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है—

1. राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से प्राप्त ऋण

जब राज्य सरकार केंद्र सरकार के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से ऋण प्राप्त करती है, तो उन ऋणों पर लागू सभी नियम एवं शर्तें (Terms and Conditions) सहायक ऋण पंजिका (Subsidiary Loan Register - SLR) में दर्ज की जाती हैं। साथ ही आवश्यक प्रविष्टियाँ महालेखाकार कार्यालय के VLC पैकेज के ऋण मॉड्यूल (Loan Module) में भी की जाती हैं।

ऐसे सभी ऋणों का लेखांकन निम्नलिखित मुख्य लेखा शीर्ष (Major Head) के अंतर्गत किया जाता है—

6003 – राज्य सरकार का आंतरिक ऋण (Internal Debt of the State Government)


2. भारत सरकार से प्राप्त ऋण एवं अग्रिम

भारत सरकार से प्राप्त ऋणों एवं अग्रिमों का विवरण भी सहायक ऋण पंजिका (SLR) में दर्ज किया जाता है, जिसमें ऋण की सभी शर्तों एवं नियमों का उल्लेख किया जाता है। तत्पश्चात इनका विवरण कार्यालय के VLC मॉड्यूल में भी प्रविष्ट किया जाता है।

इन ऋणों एवं अग्रिमों का लेखांकन निम्नलिखित मुख्य लेखा शीर्ष के अंतर्गत किया जाता है—

6004 – केंद्र सरकार से प्राप्त ऋण (Loans from the Central Government)


3. राज्य सरकार द्वारा दिए गए ऋण एवं अग्रिम

राज्य सरकार द्वारा दिए गए ऋणों एवं अग्रिमों के संबंध में महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) कार्यालय विभिन्न कोषागारों (Treasuries) द्वारा प्रस्तुत मासिक खातों (Monthly Accounts) के आधार पर ऋण एवं अग्रिमों के आंकड़ों का समेकन (Consolidation) करता है।

ऋणों का लेखा-बही (Ledger) संधारित करते समय संबंधित स्वीकृति आदेशों (Sanctions) में उल्लिखित नियमों एवं शर्तों का पूर्णतः पालन किया जाता है।


ऋण एवं अग्रिमों के संबंध में अपनाई जाने वाली समय-सारणी (Time Schedule)

(i) स्वीकृति प्रविष्टि (Sanction Entry)

स्वीकृति आदेश प्राप्त होने पर उसकी प्रविष्टि एक सप्ताह के भीतर की जाती है।

(ii) “8658 – CAO RBS” के अंतर्गत लंबित राशि का निपटान

“8658 – CAO RBS” शीर्ष के अंतर्गत लंबित राशि को स्वीकृति आदेश प्राप्त होते ही अंतरण प्रविष्टि (Transfer Entry) के माध्यम से समायोजित/निपटान (Clear) कर दिया जाता है।