इतिहास

जून 1973 से पहले, रक्षा लेखापरीक्षा विभाग के प्रमुख के रुप में लेखापरीक्षा रक्षा सेवा निदेशक (डीएडीएस) थल सेना, नौसेना, वायु सेना और आयुध कारखानों की लेखापरीक्षा के लिए जिम्मेदार था। जून 1973 में आयुध कारखाने की लेखापरीक्षा एक मुख्य लेखापरीक्षक को सौंपी गई थी, जिसे बाद में कोलकाता में, प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा (आयुध निर्माणियां) के रुप में नामित किया गया था, जहाँ आयुध निर्माणियां बोर्ड कार्यालय तथा महानिदेशक, आयुध निर्माणियां स्थित हैं।

वायु सेना, नौसेना, एसोसिएटेड रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिटस और कोस्टगार्ड संगठन की प्राप्तियों और व्यय की लेखापरीक्षा को निदेशक लेखापरीक्षा (वायु सेना तथा नौसेना) को सौंपा गया था (तब से प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा (वायु सेना तथा नौसेना) के रुप में पुन: नामित किया गया है) तथा उनका कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है। महानिदेशक, लेखापरीक्षा, रक्षा सेवाएं फिर भी सभी रक्षा लेन देन के लिए प्रधान लेखापरीक्षा अधिकारी है।

महानिदेशक, लेखापरीक्षा, रक्षा सेवाएं, प्रधान निदेशक, लेखापरीक्षा (वायु सेना तथा नौसेना) तथा प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा (आयुध निर्माणियां) की अध्यक्षता वाले विंग को क्रमश: सेना लेखापरीक्षा विंग, वायु सेना तथा नौसेना लेखापरीक्षा विंग तथा फैक्ट्री लेखापरीक्षा विंग के रुप में संदर्भित किया गया है।

हालांकि रक्षा लेखापरीक्षा विभाग को लेखापरीक्षा की सुविधा के लिए अनुबंध ‘ए’ मे अलग विभागों में विभाजित किया गया है, विभाग का पूरा स्टाफ महानिदेशक लेखापरीक्षा, रक्षा सेवाएं, नई दिल्ली द्वारा नियंत्रित एक ही संवर्ग में है तथा सभी कर्मचारियों की तैनाती तथा स्थानानतरण पूरी तरह से उसकी जिम्मेदारी है। प्रशासनिक और अन्य व्यवस्थाओं को सीएजी के डीओ पत्र संख्या 120/ओएम/80/73 दिनांक 29.05.1973 और लेखापरीक्षा रक्षा सेवाएं भाग 1 कार्यालय आदेश सं. 2 दिनांक 3.2.1986, (स.5854/ए-प्रशा/227/85 दिनांक 3.2.86 के तहत पृष्ठांकित महानिदेशक लेखापरीक्षा पार्ट 1 कार्यालय आदेश सं. 26 दिनांक 19.03.90 तथा प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा भाग-2 कार्यालय आदेश सं. 26 दिनांक 19.03.1990 तथा प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा, रक्षा सेवाएं, (वायुसेना और नौ सेना) भाग-1 कार्यालय आदेश सं. 1 दिनांक 09.03.1990, में परिभाषित किया गया है।

विभाग में लागू लेखापरीक्षा, लेखापरीक्षा मानकों, एमएसओ (लेखापरीक्षा) और सीएजी द्वारा समय-समय पर जारी अन्य निर्देशों पर आधारित एक सांवधिक लेखापरीक्षा है।

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