परिचय

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सी एंड ए जी) के प्राधिकार एवं कर्तव्य के बारे में मुख्यतः भारत के संविधान के अनुच्छेद 149 से 151 में प्रतिपादित है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें (डीपीसी) अधिनियम, 1971 की धारा 16 नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक को  भारत सरकार तथा प्रत्येक राज्य सरकार और संघ शासित क्षेत्रों, जिनकी विधान-सभा है, की सभी प्राप्तियों (राजस्व और पूंजीगत दोनों) की लेखापरीक्षा करने और स्वयं को संतुष्ट करने कि राजस्व का निर्धारण, संग्रहण और उचित आबंटन का यथाविधि पालन किया जा रहा है, प्राधिकृत करता है। तदनुसार, प्रत्यक्ष कर के केंद्रीय राजस्व की लेखापरीक्षा करने का अधिदेश भारत का संविधान और भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम, 1971 की धारा 16 से व्युत्पन्न है।

     नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के डीपीसी अधिनियम की धारा 13 भारत की समेकित निधि तथा प्रत्येक राज्य सरकार/संघ शासित क्षेत्र, जिनकी विधान सभा है, के सभी व्यय; आकस्मिक निधि तथा लोक लेखाओं के संबंध में संघ एवं राज्यों की सभी लेनदेन की लेखापरीक्षा करने के लिए नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक को प्राधिकृत करती है।

     कर्नाटक और गोवा क्षेत्र में स्थित आयकर विभाग (आईटीडी) के कार्यालयों के संबंध में लेखापरीक्षा का क्षेत्राधिकार प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा (केंद्रीय), बेंगलूरु के अधीन है।

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